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क्या आप बता सकते हो कि हनुमान जी के जीवन की एकमात्र हार किस युद्ध में हुई थी ?


 हनुमान जी एक ऐसे वीर हुए है जो कभी नहीं हारे लेकिन सिर्फ एक जगह ही उनकी हार हम मान सकते या हार नहीं भी मान सकते क्यों की उस समय उनकी उम्र काफी छोटी थी या यु कहे की वो बालक ही थे । तो बात है एक बार श्री देवकी जी (हनुमान जी के पिताजी ) और माता अँजेनी किसी सत्संग के लिए घर से बाहर गए थे तो घर पर हनुमान जी को अकेला छोड़ना था तो उन्होंने हनुमान जी को कहा की पीछे से कोई शरारत मत करना लेकिन हनुमान जी ठहरे चंचल बचपन में तो उनकी माताजी ने कहा की पीछे से बाग़ के सारे फल मत तोड़ देना कच्चे फल नहीं खाने सिर्फ लाल लाल पक्के हुए फल ही खाने है बोले ठीक है जी। तो हनुमान जी अकेले थे और जब उनको भूख लगी तो वो खिड़की में बैठे अपने बाग़ को देख रहे थे और पके हुए फल ढूंढ रहे थे लेकिन काफी खोजबीन के बाद भी कोई ऐसा फल नहीं दिखा जो पका हुआ हो ,
तो फिर एक तितली आयी खिड़की से उनके पास उडते उड़ाते फिर क्या था लग गए हनुमान जी उसकी सुन्दरता को देख क पकड़ने जब वो उसको पकड़ने की कोशिस कर रहे थे उनकी नजर एक दम से सूर्य के ऊपर पड़ी जो काफी लाल था उस टाइम और पूरा गोल गोल लग रहा था फिर क्या था हनुमान जी ने सोचा ये फल है और निकल दिए उसको खाने और पहुंच गए सूर्य क पास और भर लिया अपने मुँह में जब इंद्रा देव ने ये देखा तो उन्होंने सोचा की ये बालक क्या कर रहा है और हनुमान जी को ना खजाने क लिए बोलै लेकिन हनुमान जी थे हठ वाले नहीं मानी उनकी बात और लगे खाने तो जब सूर्य थोड़ा सा बचा तो इंद्रा देव ने सोचा ये नहीं मान ने वाला और अगर सूर्य को खा गया तो बिना सूर्य क त्यों साड़ी शरष्टि ख़तम हो जाएगी फिर उन्होंने अपने वज्रा से हनुमान जी के ऊपर प्रहार किया और हनुमान जी प्रहार की वजह से मूर्छित हो कर गिर ने लगे निचे तो पवन देव को जब हनुमान जी निचे गिरते दिखे तो उन्होंने उनको हवा में ही पकड़ लिया
और उनको एक गुफा में ले गए और नाराज होकर अपने आप को भी उस गुफा में ही कैद कर लिया। तो जैसा की आप जानते है की पवन देव जाप की हवा के देवता है अगर हवा नहीं होगी गतो कौन कैसे जियेगा बस फिर क्या था सब पेड़ पौधे सुख गए और जानवर मरने लगे तो सारे देवता इक्कठे हो कर उनके पास गए और उनसे माफ़ी मांगी और हनुमान जी को आशीर्वद दिया फिर जा क कही पवन देव माने। बस इस घटना को छोड़ क और कही भी कोई ऐसा जिक्र नहीं आता जहा हनुमान जी हारे हो और इसमें भी हम हार नहीं मान सकते क्यों की उन्होंने कोई लड़ाई नहीं की थी बस इंद्रा देव ने अनजाने में वज्रा से प्रहार कर दिया। तो आशा करता हु की आपको मेरा उत्तर पसंद आया होगा तो मुझे उपवोटे जरूर करे धन्यवाद्। आप अगर हनुमान चालीसा रोज़ पढ़ते है तो आपके जीवन के सारे दुःख दर्द दूर हो जायेंगे 

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